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नवरात्रि में माँ बगलामुखी कवच का महत्व और सिद्धि विधि

Acharya Pandit Vishnu Sharma
31 Mar 2026
5 min read
नवरात्रि में माँ बगलामुखी कवच का महत्व और सिद्धि विधि

नवरात्रि 2025 देवी शक्ति की आराधना का पावन पर्व है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इनमें माँ बगलामुखी की साधना विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती है।
माँ बगलामुखी को शत्रु नाशिनी और वाणी एवं बुद्धि पर नियंत्रण देने वाली देवी कहा जाता है। उनकी कृपा से शत्रुओं का नाश, वाणी में शक्ति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। नवरात्रि में माँ बगलामुखी कवच का जाप और सिद्धि करने से साधक को अद्भुत आध्यात्मिक व भौतिक लाभ मिलते हैं।

माँ बगलामुखी कवच का महत्व

  1. शत्रु निवारण: कवच साधना से शत्रुओं की सभी योजनाएँ निष्फल हो जाती हैं।
     
  2. वाणी और वाद-विवाद में विजय: कवच का प्रभाव वाणी को मधुर और शक्तिशाली बनाता है, जिससे व्यक्ति वाद-विवाद और कोर्ट केस में विजय प्राप्त करता है।
     
  3. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: माँ बगलामुखी कवच साधना से साधक के चारों ओर दिव्य सुरक्षा कवच बन जाता है।
     
  4. आर्थिक और व्यावसायिक उन्नति: कवच की कृपा से धन, वैभव और व्यापार में उन्नति होती है।
     
  5. मानसिक शांति: यह साधना मन को एकाग्र और निडर बनाती है।
     

नवरात्रि में माँ बगलामुखी कवच सिद्धि विधि

नवरात्रि में यह साधना विशेष फलदायी मानी जाती है। सिद्धि प्राप्त करने के लिए यह विधि अपनाएँ –

  1. शुद्धि और संकल्प: नवरात्रि के किसी भी दिन स्नान कर पीले वस्त्र पहनें और माँ बगलामुखी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
     
  2. पीले आसन का उपयोग: माँ बगलामुखी को पीला रंग प्रिय है, इसलिए पीले आसन और वस्त्र का प्रयोग अवश्य करें।
     
  3. मंत्र जाप:

    • कवच सिद्धि हेतु प्रतिदिन कम से कम 108 बार बगलामुखी कवच मंत्र का जाप करें।
       
    • मंत्र जाप के समय हल्दी की माला (108 दाने) का उपयोग करना शुभ होता है।
       
  4. हवन:
    • नवरात्रि के अष्टमी या नवमी के दिन बगलामुखी हवन अवश्य करें।
       
    • इसमें हल्दी की जड़, पीली सरसों, चने की दाल और शहद का प्रयोग करें।
       
  5. पूजा सामग्री: पीले पुष्प, चना, हल्दी, गुड़ और पान का भोग अर्पित करें।
     
  6. नियमितता: नौ दिनों तक नियमपूर्वक साधना करने से कवच की सिद्धि प्राप्त होती है।
     

नवरात्रि के 9 दिन और कवच साधना

  • पहला दिन: शक्ति स्थापना और माँ शैलपुत्री की आराधना के साथ कवच साधना की शुरुआत।
     
  • दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा और व्रत संकल्प के साथ कवच का जाप।
     
  • तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा की कृपा से मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।
     
  • चौथा दिन: माँ कूष्मांडा की साधना से जीवन में समृद्धि आती है।
     
  • पाँचवाँ दिन: माँ स्कंदमाता की कृपा से साधना में दृढ़ता मिलती है।
     
  • छठा दिन: माँ कात्यायनी की पूजा से शत्रु नाश होता है।
     
  • सातवाँ दिन: माँ कालरात्रि की कृपा से भय और बाधाएँ दूर होती हैं।
     
  • आठवाँ दिन: माँ महागौरी की कृपा से सफलता और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
     
  • नवाँ दिन: माँ सिद्धिदात्री की कृपा से कवच साधना पूर्णता प्राप्त करती है।
     

माँ बगलामुखी कवच जाप के लाभ

  • कोर्ट केस और वाद-विवाद में विजय।
     
  • शत्रु और विरोधियों का नाश।
     
  • नकारात्मक शक्तियों और तंत्र-मंत्र से रक्षा।
     
  • व्यवसाय और नौकरी में सफलता।
     
  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि।

FAQ

Q1: नवरात्रि में माँ बगलामुखी कवच का जाप कब करना चाहिए?
👉 सुबह सूर्योदय के बाद या रात को 9 बजे के बाद जाप करना सबसे शुभ माना जाता है।

Q2: क्या ऑनलाइन बगलामुखी हवन बुक किया जा सकता है?
👉 जी हाँ, आप पंडित विष्णु शर्मा जी के मार्गदर्शन में ऑनलाइन हवन बुक कर सकते हैं।

Q3: कवच जाप कितने दिनों तक करना चाहिए?
👉 नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक नियमित जाप करने से ही सिद्धि प्राप्त होती है।

Q4: बगलामुखी कवच किसे पहनना चाहिए?
👉 जिन लोगों को शत्रु बाधा, कोर्ट केस या नकारात्मक शक्तियों का भय हो, वे अवश्य यह कवच धारण करें।

निष्कर्ष

नवरात्रि माँ बगलामुखी की आराधना और कवच सिद्धि का सबसे उपयुक्त समय है। यदि आप शत्रु नाश, विजय, आर्थिक समृद्धि और मानसिक शांति की तलाश में हैं, तो इस बार नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी कवच की साधना अवश्य करें।

अभी पंडित विष्णु शर्मा जी से संपर्क करके ऑनलाइन बगलामुखी कवच साधना और हवन बुक करें और माँ बगलामुखी की कृपा से जीवन में सफलता और सुरक्षा प्राप्त करें।

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Acharya Pandit Vishnu Sharma

Acharya, Nalkheda Siddha Peeth · 26+ Years Experience

With over two decades of intense spiritual practice at Nalkheda, Acharya Pandit Vishnu Sharma has guided more than 15,000 devotees toward victory and protection through authentic Baglamukhi rituals.

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