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नवरात्रि 2025: माँ बगलामुखी मंदिर दर्शन और 9 दिन की पूजा विधि

Acharya Pandit Vishnu Sharma
08 Apr 2026
5 min read
नवरात्रि 2025: माँ बगलामुखी मंदिर दर्शन और 9 दिन की पूजा विधि

नवरात्रि वह समय है जब पूरे भारत में देवी शक्ति की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों में भक्त विभिन्न शक्तिपीठों और देवालयों में जाकर माँ दुर्गा और उनके स्वरूपों का दर्शन करते हैं।
 माँ बगलामुखी, जिन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, विशेष रूप से शत्रु नाश और विजय प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी मंदिरों में दर्शन और पूजा का अत्यधिक महत्व है क्योंकि इस समय उनकी साधना से शुभ फल कई गुना बढ़ जाते हैं।

माँ बगलामुखी मंदिर का महत्व

माँ बगलामुखी का प्रमुख मंदिर आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर धार्मिक और तांत्रिक दोनों ही तरह की साधनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ नवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यहां किया जाने वाला बगलामुखी हवन (अग्नि अनुष्ठान) दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारत और अन्य देशों से लोग दर्शन (पूजा), हवन और पूजा (प्रार्थना) के लिए आते हैं। यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इन मंदिरों की विशेषता यह है कि यहाँ माँ की पीली आभा और पीत वस्त्रों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मान्यता है कि इन स्थानों पर दर्शन और पूजा करने से शत्रु का नाश, मुकदमों में विजय और जीवन की हर समस्या का समाधान मिलता है।

इन नौ दिनों में माँ बगलामुखी मंदिरों में विशेष आरती, यज्ञ, अनुष्ठान और साधनाएँ संपन्न की जाती हैं।
 

नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी मंदिर दर्शन की विशेषता

  1. मंदिर में विशेष आरती: नवरात्रि में सुबह-शाम विशेष आरती का आयोजन होता है।
     
  2. यज्ञ और हवन: साधकों के लिए शक्तिशाली यज्ञ और हवन होते हैं।
     
  3. पीले भोग का महत्व: गुड़, चना और हल्दी से बने प्रसाद का वितरण किया जाता है।
     
  4. अन्य अनुष्ठान: कन्या पूजन, देवी चालीसा पाठ और रात्रि जागरण।
     

9 दिन की माँ बगलामुखी पूजा विधि

पहला दिन (प्रतिपदा)

  • विधि: कलश स्थापना कर माँ बगलामुखी का ध्यान करें।
     
  • भोग: पीले चने की दाल।
     

दूसरा दिन (द्वितीया)

  • विधि: दीपक में सरसों का तेल जलाकर माँ का पूजन करें।
     
  • भोग: गुड़ और बेसन के लड्डू।
     

तीसरा दिन (तृतीया)

  • विधि: माँ को पीले फूल अर्पित करें।
     
  • भोग: शहद।
     

चौथा दिन (चतुर्थी)

  • विधि: दुश्मनों से मुक्ति के लिए “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
     
  • भोग: हल्दी मिश्रित प्रसाद।
     

पाँचवां दिन (पंचमी)

  • विधि: कोर्ट केस और विवाद से छुटकारे के लिए यज्ञ करें।
     
  • भोग: बेसन का हलवा।

छठा दिन (षष्ठी)

  • विधि: माता को पीला वस्त्र अर्पित करें।
     
  • भोग: आम का रस।

सातवां दिन (सप्तमी)

  • विधि: वाणी और बुद्धि की शुद्धि हेतु मंत्र जप करें।
     
  • भोग: केले।

आठवां दिन (अष्टमी)

  • विधि: कन्या पूजन करें और देवी को हल्दी अर्पित करें।
     
  • भोग: नारियल और गुड़।

नौवां दिन (नवमी)

  • विधि: 108 आहूतियाँ अग्नि में दें और समापन आरती करें।
     
  • भोग: पीली खीर।
     

माँ बगलामुखी मंदिर दर्शन और पूजा के लाभ

  1. शत्रुओं से सुरक्षा और विजय।
     
  2. मुकदमों और कोर्ट केस में सफलता।
     
  3. व्यापार और नौकरी में प्रगति।
     
  4. मानसिक शांति और आत्मविश्वास।
     
  5. कष्ट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति।
     

भक्तों के अनुभव

कई श्रद्धालु बताते हैं कि नवरात्रि में माँ बगलामुखी मंदिर जाकर पूजा करने से उनकी जीवन की बड़ी समस्याएँ दूर हुईं। विशेषकर जो लोग कोर्ट केस, शत्रु बाधा या व्यवसाय में रुकावट झेल रहे थे, उन्हें यहाँ पूजा के बाद सकारात्मक परिणाम मिले।

FAQs

Q1. क्या नवरात्रि में मंदिर दर्शन अनिवार्य है?
नहीं, घर पर भी पूजा कर सकते हैं, लेकिन मंदिर दर्शन का फल कई गुना बढ़ जाता है।

Q2. क्या कोई भी माँ बगलामुखी मंत्र जप सकता है?
हाँ, परंतु विशेष साधनाएँ गुरु मार्गदर्शन में करनी चाहिए।

Q3. मंदिर में क्या भोग अर्पित करना चाहिए?
पीले रंग से जुड़े भोग जैसे गुड़, बेसन, हल्दी और चना।

निष्कर्ष

नवरात्रि 2025 माँ बगलामुखी की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। चाहे आप मंदिर जाकर पूजा करें या घर पर साधना करें, इन नौ दिनों की शक्ति आपके जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकती है। माँ बगलामुखी मंदिर का दर्शन और पूजा न सिर्फ शत्रु नाश करती है बल्कि जीवन में सफलता और शांति भी लाती है।

यदि आप नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी की विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाना चाहते हैं, तो आज ही हमारे अनुभवी पंडित जी से संपर्क करें।
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Acharya, Nalkheda Siddha Peeth · 26+ Years Experience

With over two decades of intense spiritual practice at Nalkheda, Acharya Pandit Vishnu Sharma has guided more than 15,000 devotees toward victory and protection through authentic Baglamukhi rituals.

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