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माँ बगलामुखी नलखेड़ा: नवरात्रि में हवन और अनुष्ठान करने का शुभ समय

Acharya Pandit Vishnu Sharma
25 Mar 2026
5 min read
माँ बगलामुखी नलखेड़ा: नवरात्रि में हवन और अनुष्ठान करने का शुभ समय

भारत में नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। यह नौ दिनों तक चलने वाला पावन उत्सव देवी माँ की साधना और पूजा-अर्चना को समर्पित है। विशेष रूप से नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में स्थित माँ बगलामुखी मंदिर नवरात्रि के समय लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बन जाता है।

माँ बगलामुखी को “शत्रु-विजय” और “वाणी की देवी” माना जाता है। नवरात्रि में यहाँ हवन और अनुष्ठान करने का शुभ समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इन दिनों किए गए हवन और मंत्र जाप का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़कर मिलता है।

नलखेड़ा माँ बगलामुखी मंदिर का महत्व

  • नलखेड़ा मंदिर शक्तिपीठों में से एक प्रमुख सिद्धपीठ है।
     
  • यहाँ की परंपरा है कि भक्त पीले वस्त्र धारण करके पूजा करते हैं।
     
  • नवरात्रि में इस मंदिर में बगलामुखी हवन, अनुष्ठान और विशेष साधना का आयोजन होता है।
     
  • मान्यता है कि नवरात्रि में यहाँ की गई पूजा से साधक को शत्रु पर विजय, न्याय में सफलता और जीवन में शांति प्राप्त होती है।

नवरात्रि में हवन और अनुष्ठान का महत्व

नवरात्रि के दौरान हवन और अनुष्ठान करना साधना का सबसे शक्तिशाली भाग है। नलखेड़ा में श्रद्धालु सुबह और शाम दोनों समय हवन करते हैं।

  • सुबह का समय सूर्योदय के बाद पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
     
  • शाम का समय संध्या बेला में हवन और मंत्र जाप के लिए उत्तम होता है।

नवरात्रि में प्रतिदिन हवन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।

माँ बगलामुखी मंत्र और जाप का महत्व

हवन और अनुष्ठान में मंत्र जाप का विशेष महत्व है। प्रमुख मंत्र इस प्रकार है:

"ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥"

नवरात्रि में इस मंत्र का जाप करने से:

  • शत्रुओं की शक्ति नष्ट होती है।
     
  • वाणी में सामर्थ्य और विजय प्राप्त होती है।
     
  • जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।

नवरात्रि के 9 दिन और अनुष्ठान का महत्व

पहला दिन – माँ शैलपुत्री

नवरात्रि की शुरुआत संकल्प के साथ होती है। भक्त पीले फूल और चना दाल अर्पित करके माँ बगलामुखी से आशीर्वाद मांगते हैं।

दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी

इस दिन तपस्या और संयम की देवी की पूजा होती है। भक्त सुबह मंत्र जाप और शाम को दीपदान करते हैं।

तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा

भय और संकट से मुक्ति का दिन। भक्त इस दिन हवन कर माँ बगलामुखी से साहस और शत्रु विजय की प्रार्थना करते हैं।

चौथा दिन – माँ कूष्मांडा

इस दिन से वातावरण और भी ऊर्जावान हो जाता है। भक्त विशेष रूप से पीताम्बरा हवन करते हैं।

पाँचवाँ दिन – माँ स्कंदमाता

परिवारिक सुख और संतान की उन्नति के लिए पूजा होती है। भक्त मंत्र जप कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

छठा दिन – माँ कात्यायनी

शत्रु-विनाश की देवी। नलखेड़ा मंदिर में इस दिन विशेष अनुष्ठान और बगलामुखी यज्ञ आयोजित होता है।

सातवाँ दिन – माँ कालरात्रि

नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने का दिन। भक्त रात्रि में विशेष साधना करते हैं।

आठवाँ दिन – माँ महागौरी

पवित्रता और शांति की देवी। इस दिन भक्त माँ बगलामुखी को खीर और हल्दी का भोग लगाते हैं।

नवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री

सभी इच्छाओं की पूर्ति और सिद्धियों का दिन। नलखेड़ा मंदिर में इस दिन विशाल बगलामुखी हवन होता है।

माँ बगलामुखी पूजा से मिलने वाले लाभ

  • शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता।
     
  • आत्मबल और आत्मविश्वास की वृद्धि।
     
  • नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति।
     
  • वाणी में सामर्थ्य और विजय।
     
  • धन, यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति।

नवरात्रि में नलखेड़ा जाने का शुभ समय

  • प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) – संकल्प और पूजा के लिए उत्तम।
     
  • संध्या बेला – हवन और मंत्र जाप का श्रेष्ठ समय।
     
  • नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि विशेष रूप से अनुष्ठान के लिए सबसे पवित्र मानी जाती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि 2025 में यदि आप माँ बगलामुखी की कृपा चाहते हैं, तो नलखेड़ा जाकर हवन और अनुष्ठान करना सबसे श्रेष्ठ है। यहाँ किए गए जाप, साधना और अनुष्ठान से जीवन में विजय, शांति और सकारात्मकता आती है।

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Acharya Pandit Vishnu Sharma

Acharya, Nalkheda Siddha Peeth · 26+ Years Experience

With over two decades of intense spiritual practice at Nalkheda, Acharya Pandit Vishnu Sharma has guided more than 15,000 devotees toward victory and protection through authentic Baglamukhi rituals.

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