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Spiritual Insights

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का महत्व और पूजा विधि

Acharya Pandit Vishnu Sharma
14 Jul 2026
5 min read
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का महत्व और पूजा विधि

वर्ष की दो गुप्त नवरात्रियों में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष स्थान है। वर्षा ऋतु के आरंभ में आने वाली ये नौ रात्रियाँ अंतर्मुखी साधना, मंत्र सिद्धि और दस महाविद्याओं की उपासना के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती हैं। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026, 15 से 23 जुलाई तक है, और साधक इसकी प्रतीक्षा विशेष रूप से करते हैं। इस लेख में माँ बगलामुखी गुरु इस पर्व का महत्व और सम्पूर्ण पूजा विधि प्रस्तुत कर रहा है।

जहाँ भी मान्यता का उल्लेख है, वह परंपरा व शास्त्र के अनुसार है-गारंटी नहीं।

विषय-सूची

  1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 तिथि

  2. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व

  3. आषाढ़ और माघ गुप्त नवरात्रि में अंतर

  4. दस महाविद्या और माँ बगलामुखी

  5. पूजा से पहले तैयारी और सामग्री

  6. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

  7. मंत्र और जप विधि

  8. व्रत, नियम और सावधानियाँ

  9. संक्षिप्त सार

  10. निष्कर्ष

  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 तिथि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 15 जुलाई से 23 जुलाई तक है। घटस्थापना 15 जुलाई की प्रातः होती है और समापन नवमी तिथि पर 23 जुलाई को होता है।

विवरण

2026

पर्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

तिथि

15–23 जुलाई 2026 (9 दिन)

घटस्थापना

15 जुलाई प्रातः (~05:33–10:09 IST)

देवियाँ

दस महाविद्याएँ

अपने नगर के अनुसार मुहूर्त अवश्य जाँच लें।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व इसलिए विशेष है क्योंकि यह मंत्र सिद्धि और महाविद्या साधना के लिए वर्ष का श्रेष्ठ काल माना जाता है। इन रात्रियों की अंतर्मुखी ऊर्जा एकाग्र जप, तप और संयमित उपासना के अनुकूल होती है।

परंपरा में इसे "गुप्त" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी साधना गोपनीय, एकांतिक और आत्म-केंद्रित होती है। साधक इस अवधि में कठिन साधनाएँ, अनुष्ठान और सिद्धि-प्रयोग करते हैं, जबकि गृहस्थ सरल भक्ति से माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। दोनों ही मार्ग शुभ हैं।

आषाढ़ और माघ गुप्त नवरात्रि में अंतर

दोनों गुप्त नवरात्रियाँ दस महाविद्याओं को समर्पित हैं; मुख्य अंतर केवल ऋतु और मास का है।


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

माघ गुप्त नवरात्रि

मास

आषाढ़ (जून–जुलाई)

माघ (जनवरी–फरवरी)

ऋतु

वर्षा का आरंभ

शीत ऋतु

उपास्य

दस महाविद्याएँ

दस महाविद्याएँ

स्वरूप

अंतर्मुखी साधना

अंतर्मुखी साधना

दस महाविद्या और माँ बगलामुखी

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की उपासना होती है, जिनमें माँ बगलामुखी आठवीं महाविद्या हैं। वे "पीतांबरा देवी" कहलाती हैं और स्तंभन शक्ति-शत्रु व बाधा को रोकने की शक्ति-की अधिष्ठात्री हैं।

इसी कारण संघर्ष, विवाद, शत्रु-बाधा या नकारात्मकता से जूझ रहे भक्त इस काल में विशेष रूप से माँ बगलामुखी की शरण लेते हैं। गहन कार्यों हेतु बगलामुखी अनुष्ठान और मंत्र सिद्धि हेतु बगलामुखी बीज मंत्र का जप किया जाता है।

पूजा से पहले तैयारी और सामग्री

पूजा से पूर्व सभी सामग्री तैयार रखें, ताकि नौ दिन निर्बाध चलें:

  • माँ बगलामुखी का चित्र या यंत्र

  • पीला वस्त्र और स्वच्छ चौकी

  • कलश, आम के पत्ते, नारियल

  • हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पीले पुष्प

  • घी/तिल का दीपक, धूप, हल्दी की माला

  • चना, गुड़, फल (नैवेद्य हेतु), गंगाजल

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

गृहस्थ प्रतिदिन इस सरल एवं सात्त्विक विधि का पालन कर सकते हैं:

  1. शुद्धि: प्रातः स्नान कर स्थान स्वच्छ करें, गंगाजल छिड़कें।

  2. स्थापना: पीले वस्त्र पर माँ का चित्र/यंत्र पूर्वाभिमुख रखें।

  3. घटस्थापना (प्रथम दिन): कलश स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें।

  4. संकल्प: नाम, गोत्र और शुद्ध भाव से संकल्प लें।

  5. पूजन: हल्दी, कुमकुम, पीले पुष्प, चना-गुड़ अर्पित करें।

  6. जप: हल्दी की माला पर बगलामुखी मंत्र जाप करें।

  7. पाठ: दुर्गा सप्तशती या देवी माहात्म्य का पाठ करें।

  8. आरती: बगलामुखी चालीसा व आरती से समापन करें।

नौ दिन यही क्रम निरंतर दोहराएँ। भव्यता से अधिक निरंतरता का महत्व है। यदि पूर्ण विधि संभव न हो तो माँ बगलामुखी पूजा या ऑनलाइन बगलामुखी पूजा आचार्य द्वारा करवाई जा सकती है।

मंत्र और जप विधि

जप के लिए माँ बगलामुखी का बीज मंत्र "ह्लीं" तथा मूल मंत्र प्रयुक्त होता है। जप हल्दी की माला पर, शुद्ध उच्चारण और स्थिर एकाग्रता के साथ किया जाता है।

आरंभ में प्रतिदिन एक या कुछ मालाओं से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ। शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक है-इसलिए किसी जानकार गुरु या आचार्य से मंत्र सीखकर ही गंभीर जप करें। उच्च-संख्या पुरश्चरण गुरु के मार्गदर्शन में ही करें।

व्रत, नियम और सावधानियाँ

करें

न करें

स्वच्छता व सात्त्विक आहार

प्याज, लहसुन, मांस, नशा नहीं

स्थिर आसन, समय व स्थान

बीच में साधना न तोड़ें

शुद्ध उच्चारण से जप

जल्दबाज़ी में पूजा न करें

अखंड ज्योति सुरक्षित रखें

दीप अकेला न छोड़ें

साधना-संकल्प गुप्त रखें

प्रचार न करें

रक्षा व स्थिरता हेतु उपासना

किसी को हानि के भाव से नहीं

संक्षिप्त सार

  • आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 15–23 जुलाई; मंत्र सिद्धि हेतु श्रेष्ठ काल।

  • उपास्य: दस महाविद्याएँ; माँ बगलामुखी (स्तंभन शक्ति) विशेष।

  • विधि: शुद्धि → स्थापना → संकल्प → पूजन → जप → पाठ → आरती।

  • मंत्र: बीज मंत्र "ह्लीं" व मूल मंत्र, हल्दी माला पर।

  • नियम: सात्त्विकता, संयम, गोपनीयता, निरंतरता।

निष्कर्ष

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि साधना की गंभीरता का पर्व है-जब अंतर्मुखी ऊर्जा, संयम और मंत्र मिलकर भक्त को आंतरिक बल प्रदान करते हैं। 2026 में 15 से 23 जुलाई तक इन नौ रात्रियों का सदुपयोग सरल भक्ति या प्रामाणिक अनुष्ठान से करें। माँ बगलामुखी गुरु आपकी उपासना में सहायक है। जय माँ बगलामुखी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब है? 

15 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक-नौ दिन, घटस्थापना 15 जुलाई प्रातः।

2. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का क्या महत्व है? 

यह मंत्र सिद्धि और दस महाविद्या साधना के लिए वर्ष का श्रेष्ठ अंतर्मुखी काल माना जाता है।

3. आषाढ़ और माघ गुप्त नवरात्रि में क्या अंतर है?

 केवल मास व ऋतु का-आषाढ़ (जून–जुलाई) और माघ (जनवरी–फरवरी)। दोनों दस महाविद्याओं को समर्पित हैं।

4. गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि क्या है? 

शुद्धि, स्थापना, संकल्प, पीले पदार्थों का पूजन, हल्दी माला पर मंत्र जप, सप्तशती पाठ और आरती-नौ दिन निरंतर।

5. कौन सा मंत्र जपें? 

माँ बगलामुखी का बीज मंत्र "ह्लीं" और मूल मंत्र; शुद्ध उच्चारण के साथ हल्दी की माला पर।

6. क्या घर पर पूजा कर सकते हैं? 

हाँ, सरल भक्ति व मंत्र जप घर पर सुरक्षित है। कठिन अनुष्ठान अनुभवी आचार्य से करवाएँ।

7. व्रत में क्या खाएँ?

 सामर्थ्य अनुसार सात्त्विक आहार एक बार, या फलाहार। प्याज-लहसुन, मांस व नशे से बचें।

8. क्या ऑनलाइन पूजा संभव है? 

हाँ-नाम-गोत्र से संकल्प, सही मुहूर्त पर पूजा, वीडियो व विश्वभर प्रसाद वितरण।

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Acharya Pandit Vishnu Sharma
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Acharya, Nalkheda Siddha Peeth · 25+ Years Experience

With over two decades of intense spiritual practice at Nalkheda, Acharya Pandit Vishnu Sharma has guided more than 15,000 devotees toward victory and protection through authentic Baglamukhi rituals.

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