नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्त देवी माँ की आराधना में लीन हो जाते हैं। इस पर्व के दौरान नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु नवरात्रि में दर्शन और पूजा के लिए पहुँचते हैं।
माँ बगलामुखी को पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में नलखेड़ा में माँ की साधना करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, शत्रु पर विजय मिलती है और मन को अपार शांति प्राप्त होती है।
नलखेड़ा माँ बगलामुखी मंदिर की विशेषता
- यह मंदिर माँ बगलामुखी के प्रमुख सिद्धपीठों में से एक है।
- नवरात्रि में यहाँ पीले वस्त्र धारण कर पूजा और हवन करने की परंपरा है।
- मान्यता है कि यहाँ की गई साधना का प्रभाव तुरंत दिखाई देता है।
- दूर-दराज़ से भक्त नवरात्रि में केवल माँ बगलामुखी के दर्शन हेतु आते हैं।
नवरात्रि में माँ बगलामुखी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौ दिन शक्ति उपासना के लिए श्रेष्ठ माने गए हैं। इस दौरान नलखेड़ा में माँ बगलामुखी की पूजा और हवन करने से:
- शत्रु पर विजय प्राप्त होती है।
- न्यायिक मामलों में सफलता मिलती है।
- जीवन में धन, यश और प्रतिष्ठा आती है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
माँ बगलामुखी मंत्र का महत्व
माँ बगलामुखी की आराधना बिना मंत्र जाप के अधूरी मानी जाती है। नवरात्रि में साधक विशेष रूप से यह मंत्र जपते हैं:
"ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥"
इस मंत्र का जाप करने से शत्रु की शक्ति निष्फल हो जाती है और साधक को विजय व शक्ति प्राप्त होती है।
नवरात्रि के 9 दिन और माँ बगलामुखी साधना
पहला दिन – माँ शैलपुत्री
श्रद्धालु नवरात्रि की शुरुआत माँ बगलामुखी को पीले पुष्प अर्पित कर करते हैं।
दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी
तप की देवी की आराधना। भक्त नलखेड़ा में हवन की तैयारी करते हैं।
तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा
भय से मुक्ति के लिए प्रार्थना। भक्त माँ बगलामुखी से साहस माँगते हैं।
चौथा दिन – माँ कूष्मांडा
ऊर्जा और स्वास्थ्य का दिन। इस दिन पीताम्बरा हवन किया जाता है।
पाँचवाँ दिन – माँ स्कंदमाता
परिवारिक सुख की कामना। भक्त माँ बगलामुखी को हल्दी और चने की दाल अर्पित करते हैं।
छठा दिन – माँ कात्यायनी
शत्रु-विनाश के लिए विशेष मंत्र जाप किया जाता है।
सातवाँ दिन – माँ कालरात्रि
भय और संकट से मुक्ति। भक्त पूरी रात जप और ध्यान करते हैं।
आठवाँ दिन – माँ महागौरी
शांति और शुद्धता का दिन। भक्त माँ बगलामुखी को खीर का भोग लगाते हैं।
नवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री
सिद्धि और शक्ति प्राप्त करने का दिन। नलखेड़ा में विशाल हवन और कन्या पूजन होता है।
नवरात्रि में नलखेड़ा जाने का महत्व
नवरात्रि में नलखेड़ा जाने का महत्व यह माना जाता है कि इस मंदिर में की गई साधना कई गुना फल देती है। भक्त कहते हैं कि माँ बगलामुखी स्वयं यहाँ साधक की रक्षा करती हैं और उनकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं।
माँ बगलामुखी पूजा से प्राप्त लाभ
- शत्रुओं पर विजय।
- न्यायिक मामलों में सफलता।
- आत्मबल और आत्मविश्वास की प्राप्ति।
- नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति।
- जीवन में सुख, शांति और समृद्धि।
निष्कर्ष
नवरात्रि 2025 में नलखेड़ा का माँ बगलामुखी मंदिर शक्ति साधना का सबसे बड़ा तीर्थ बन जाता है। यहाँ की गई पूजा और हवन से भक्त के जीवन में नई ऊर्जा, साहस और विजय आती है।
इस नवरात्रि माँ बगलामुखी के मंत्रों का जाप करें, हवन करें और यदि संभव हो तो नलखेड़ा जाकर उनके दर्शन अवश्य करें।
इस नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी की कृपा पाने के लिए नलखेड़ा मंदिर में विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठान करवाएँ।
पंडित विष्णु शर्मा जी, जो माँ बगलामुखी साधना और अनुष्ठान के विशेषज्ञ हैं, आपके लिए पूर्ण विधि-विधान से पूजा संपन्न कराएंगे।
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