बगलामुखी जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
वैशाख शुक्ल अष्टमी को मनाया जाने वाला यह पर्व 2026 में अत्यंत शुभ संयोग के साथ आ रहा है।
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WhatsApp पर पूछें →माँ बगलामुखी — कौन हैं ये देवी?
माँ बगलामुखी की पौराणिक कथा
सृष्टि रक्षा की कथा
सतयुग में एक विनाशकारी तूफान आया जिसने पूरी सृष्टि को संकट में डाल दिया। समस्त जीव-जगत, देवता और ऋषि-मुनि भयभीत हो उठे। तब भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के तट पर जाकर देवी शक्ति की घोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ पीताम्बरा ने हरिद्रा सरोवर से प्रकट होकर उस महाप्रलयंकारी तूफान को स्तंभन शक्ति से तत्काल स्थिर कर दिया और समस्त सृष्टि की रक्षा की।
मदन असुर का स्तम्भन
"मदन" नामक असुर अपनी दुष्ट वाणी से धर्म, नीति और सत्य को नष्ट कर रहा था। माँ बगलामुखी ने उस असुर की जिह्वा पकड़कर उसे स्तंभित कर दिया। यह घटना शिक्षा देती है — दुर्वाणी, असत्य और अधर्म सदैव माँ बगलामुखी की कृपा से नष्ट होते हैं।
रामायण काल
मान्यता है कि भगवान राम ने हनुमान जी के मार्गदर्शन में रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए माँ बगलामुखी की उपासना की थी और देवी ने उन्हें ब्रह्मास्त्र की विद्या प्रदान की।
महाभारत काल
महाभारत काल में पांडवों ने भी बंखंडी (हिमाचल प्रदेश) में माँ बगलामुखी मंदिर की स्थापना कर उनकी आराधना की थी। भीम और अर्जुन ने यहाँ विशेष साधना की।
जयंती का आध्यात्मिक महत्व
इस दिन की गई पूजा, जप और हवन का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है।
शत्रुओं पर विजय
जो साधक इस दिन विधि-विधान से माँ की उपासना करते हैं, उनके शत्रु स्वतः ही स्तंभित हो जाते हैं।
शत्रु विनाश पूजा देखेंन्यायिक सफलता
कोर्ट-कचहरी, कानूनी विवादों और प्रतिस्पर्धा में माँ बगलामुखी की साधना को अचूक माना गया है।
कोर्ट केस विजय पूजाकाले जादू से मुक्ति
माँ बगलामुखी अभिचार और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी हैं।
Black Magic Removalप्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता
नौकरी, प्रमोशन और परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए माँ का आशीर्वाद विशेष शुभ है।
Career Growth Pujaमंगल दोष से राहत
माँ बगलामुखी की उपासना मंगल (Mars) से संबंधित समस्याओं को दूर करती है।
मंगल दोष निवारणकुंडलिनी जागरण
माँ बगलामुखी का मंत्र स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत करने में सहायक माना जाता है।
Baglamukhi Sadhanaबगलामुखी जयंती 2026 पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में आरम्भ होने वाला यह सम्पूर्ण विधान अत्यंत फलदायी माना जाता है।
🚿 स्नान और शुद्धि
सूर्योदय से पूर्व गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करें। यदि संभव हो तो पानी में हल्दी डालकर स्नान करें क्योंकि हल्दी (हरिद्रा) माँ बगलामुखी को अत्यंत प्रिय है।
💛 पीले वस्त्र धारण
माँ पीताम्बरा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
🏠 पूजा स्थान की सज्जा
पूजा स्थान शुद्ध रखें। पीले कपड़े से आसन बनाएं। माँ बगलामुखी की तस्वीर या मूर्ति को पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें।
🐘 गणेश पूजन
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करें। माँ बगलामुखी की पूजा से पहले संक्षिप्त गणेश वंदना करें।
🧘 गुरु ध्यान
तांत्रिक परंपरा में गुरु का आह्वान अनिवार्य है। यदि गुरु हैं तो उनका ध्यान करें, अन्यथा ईश्वर को ही गुरु मानकर प्रार्थना करें।
🌼 पंचोपचार / षोडशोपचार पूजन
माँ को पीले फूल, पीले फल, हल्दी, बेसन के लड्डू, नारियल और पीले वस्त्र अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाएं।
📿 मंत्र जाप
हल्दी की माला पर बगलामुखी मूल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
🙏 आरती और दान
पूजन के पश्चात माँ बगलामुखी की आरती करें। पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल और अन्न का दान करें।
माँ बगलामुखी के शक्तिशाली मंत्र
मंत्र का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट और एकाग्रचित्त होकर करना चाहिए।
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।।
Om Hleem Baglamukhi Sarvadushtanam Vacham Mukham Padam Stambhaya Jihvam Kilaya Buddhim Vinashaya Hleem Om Swaha
ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै नमः।।
Om Hleem Baglamukhyai Namah
यही माँ बगलामुखी का एकाक्षर बीज है — शत्रुओं की बुद्धि को नियंत्रित करने में अत्यंत शक्तिशाली।
बगलामुखी जयंती पर क्या करें, क्या न करें
✓ क्या करें (Do's)
✗ क्या न करें (Don'ts)
माँ बगलामुखी के प्रमुख मंदिर
जहाँ जाकर मिलती है विशेष कृपा — जयंती 2026 पर इन तीर्थों में विशेष पूजा का आयोजन।
श्री पीताम्बरा पीठ
माँ बगलामुखी का सर्वाधिक प्रसिद्ध सिद्धपीठ। 1920 के दशक में स्थापित। ग्वालियर से 75 किमी, झाँसी से 29 किमी। यहाँ माँ धूमावती का भी प्रसिद्ध मंदिर है।
बगलामुखी मंदिर
पठानकोट-मंडी राजमार्ग पर। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने एक ही रात में इस मंदिर की स्थापना की थी।
बगलामुखी मंदिर
आगर-मालवा जिले में। तांत्रिक साधनाओं के लिए विश्वविख्यात। नवरात्रि पर लाखों भक्त आते हैं।
कामाख्या मंदिर
तंत्रसाधना का सर्वोच्च केंद्र। यहाँ दस महाविद्याओं के अलग-अलग मंदिर हैं जिनमें माँ बगलामुखी का मंदिर भी सम्मिलित है।
माँ बगलामुखी धाम
महिलापुर, होशियारपुर में बदोवां के पास स्थित मंदिर और लुधियाना में माँ बगलामुखी धाम।
बगलापीठम
दक्षिण भारत का प्रमुख बगलामुखी तीर्थ। कांचीपुरम जिले में वल्लकोट्टई के पास।
जयंती 2026 पर विशेष
इन सभी प्रमुख मंदिरों में 24 अप्रैल 2026 को विशेष पूजा, हवन और कीर्तन-जागरण का आयोजन किया जाएगा। यदि संभव हो तो दतिया पीठ या नलखेड़ा मंदिर में जाकर माँ का दर्शन करें।
नलखेड़ा मंदिर की जानकारीबगलामुखी जयंती और आधुनिक जीवन
आज के भागदौड़ भरे जीवन में माँ बगलामुखी की उपासना का महत्व और भी बढ़ गया है। "स्तंभन" का अर्थ केवल शत्रुओं को रोकना नहीं है — इसका गहरा अर्थ है अपनी नकारात्मक आदतों, क्रोध, आवेश और बुरे विचारों को नियंत्रित करने की शक्ति प्राप्त करना।
"जो व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है, वह जीवन के हर क्षेत्र में — चाहे वह व्यवसाय हो, राजनीति हो, परिवार हो या समाज — सफलता प्राप्त करता है।"
बगलामुखी जयंती इस बात का स्मरण कराती है कि ईश्वरीय शक्ति केवल बाहरी दुश्मनों को हराने के लिए नहीं है — वह हमारे भीतर के अज्ञान, भय और कमजोरियों को भी नष्ट कर देती है।
24 अप्रैल 2026 — एक अवसर, एक संकल्प
इस दिन पीले वस्त्र पहनें, माँ का ध्यान करें, बगलामुखी मंत्र का जाप करें और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकल्प लें।
जय माँ बगलामुखी। जय पीताम्बरा माँ। 🙏