माँ बगलामुखी, दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या, शत्रु-नाश और वाक्-सिद्धि की देवी के रूप में जानी जाती हैं। माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में स्थित यह पवित्र स्थल, भक्तों के लिए आध्यात्मिक शक्ति और मनोकामना पूर्तिका केंद्र है। उनकी साधना से न केवल जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, बल्कि साधक को आत्मविश्वासऔर सफलता भी प्राप्त होती है। इस ब्लॉग में हम आपको माँ बगलामुखी को प्रसन्न करने की सरल और प्रभावी पूजा विधि केसाथ-साथ कुछ खास उपाय बताएंगे, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
माँबगलामुखी का स्वरूप और महत्व
माँ बगलामुखी, जिन्हें पीतांबरा भी कहा जाता है, पीले रंग से विशेष रूप से जुड़ी हैं। यह रंग उनकी शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है। माँ बगलामुखी माता मंदिर, नलखेड़ा में उनकी स्वयंभूमूर्ति भक्तों के लिए चमत्कारिकअनुभवों का स्रोत है। मान्यता है कि माँ बगलामुखी की उपासना से शत्रुओं का नाश होता है, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय मिलती है, और साधक को वाणी की सिद्धि प्राप्त होती है। माँ बगलामुखी मंदिर में हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं, विशेषकर नवरात्रि के दौरान, जब यहाँ भक्ति का माहौल चरम पर होता है।
माँ बगलामुखी की पूजा विधि: एक सरल मार्गदर्शिका
माँ बगलामुखी की पूजा विधि को सरलता से घर पर या माँ बगलामुखी माता मंदिर, नलखेड़ा में किया जा सकता है। यहाँ पंचोपचार पूजा की विधि दी गई है, जो समय की कमी वाले भक्तों के लिए उपयुक्त है:
1. पूजाकी तैयारी
- स्नान और शुद्धता: प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। माँ बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है।
- पूजा स्थल: एक शांत स्थान चुनें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएँ और माँ बगलामुखी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- सामग्री: पीले फूल (गेंदा या चमेली), हल्दी, पीले चावल, घी का दीपक, धूप, और पीली मिठाई (जैसे लड्डू या बेसन का हलवा) तैयार करें।
2. आह्वानऔर संकल्प
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, पीले चावल, और फूल लेकर संकल्प करें:
“मैं माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्ति और अपनी मनोकामना (विशिष्ट इच्छा बताएँ) की पूर्ति के लिए यह पूजा कर रहा/रही हूँ।” - आह्वान मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा।
3. पूजाके चरण
- गणेश पूजा: सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
एक फूल और हल्दी चढ़ाएँ। - दीप-धूप: घी का दीपक जलाएँ (बत्ती को हल्दी में रंगकर उपयोग करें) और धूप प्रज्वलित करें।
- नैवेद्य: माँ को पीली मिठाई, फल, और नारियल अर्पित करें। नैवेद्य को जल से ढककर रखें और चौकोर मंडल बनाकर उस पर थाली रखें।
- चंदन और हल्दी: माँ की मूर्ति पर अनामिका उंगली से चंदन और हल्दी का तिलक लगाएँ।
4. मंत्रजप
माँ बगलामुखी का प्रभावशाली मंत्र है:
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।
- हल्दी की माला या तुलसी की माला से 108 बार जप करें।
- जप के दौरान शुद्ध उच्चारण और एकाग्रता बनाए रखें।
5. हवन (वैकल्पिक)
यदि संभव हो, तो माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में हवन करें। हवन में तिल, चावल, और घी का उपयोग करें। प्रत्येक आहुति के साथ उपरोक्त मंत्र का जप करें । यह शत्रु बाधा निवारण और सफलता के लिए अत्यंतप्रभावी है।
6. विसर्जनऔर प्रसाद
- पूजा के अंत में माँ से क्षमा याचना करें और जल अर्पित कर विसर्जन करें।
मंत्र: ॐ बगलामुखी देव्यै नमः। - प्रसाद को परिवार और जरूरतमंदों में बाँटें।
माँबगलामुखी को प्रसन्न करने के विशेष उपाय
- पीले वस्त्र दान: शुक्रवार या रविवार को माँ बगलामुखी माता मंदिर में पीले वस्त्र चढ़ाएँ। यह आर्थिक समृद्धि और शत्रु नाश के लिए प्रभावी है।
- हल्दी की माला: नियमित रूप से हल्दी की माला से मंत्र जप करें। इससे वाणी में मधुरता और प्रभावशाली शक्ति आती है।
- नवरात्रि पूजा: माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और हवन में भाग लें। यह समय माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ है।
- ब्रह्मचर्य पालन: पूजा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें। यह माँ की साधना को शीघ्र फलदायी बनाता है।
- कवच पाठ: माँ बगलामुखी कवच का पाठ करें। यह सुरक्षा और सिद्धि प्रदान करता है।
माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा का महत्व
मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में लखुंदर नदी के तट पर स्थितमाँ बगलामुखी मंदिर एक प्राचीन औरचमत्कारिक शक्ति पीठ है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर की थी। माँ बगलामुखी की स्वयंभू मूर्ति के साथ-साथ माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वतीकी उपस्थिति इस मंदिर कोत्रिशक्ति का केंद्र बनाती है। यहाँ की तांत्रिक साधनाएँ और हवन विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
सावधानियाँ और सुझाव
- शुद्धता: पूजा में सभी सामग्री सात्विक और ताजी होनी चाहिए। कृत्रिम या सूखे फूलों का उपयोग न करें।
- मंत्र उच्चारण: मंत्रों का सही उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि संभव हो, तो किसी विद्वान पंडित से मार्गदर्शन लें।
- श्रद्धा और विश्वास: माँ बगलामुखी की पूजा में श्रद्धा और विश्वास सबसे बड़ा उपाय है। मन में संदेह न रखें।
- रात्रि साधना: यदि गहन साधना कर रहे हैं, तो रात 10 बजे से प्रातः 4 बजे के बीच मंत्र जप करें।
अंतिम विचार
माँ बगलामुखी की पूजा न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाती है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि, और आत्मविश्वास भी प्रदान करती है। माँ बगलामुखी माता मंदिर, नलखेड़ा में दर्शन और पूजा काअनुभव आपके जीवन को नई दिशा दे सकता है। इस सरल पूजाविधि और उपायों कोअपना कर आप माँ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
जय माँ बगलामुखी!