भारत की पावन धरा पर शक्ति साधना और भक्ति का सबसे बड़ा पर्व है शारदीय नवरात्रि। इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू होकर 1 अक्टूबर 2025 तक मनाई जाएगी। इस पूरे पावन काल में नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
नवरात्रि में भक्तजन माँ के दर्शन, हवन और अनुष्ठान के माध्यम से अपनी जीवन की हर समस्या का समाधान पाने यहाँ आते हैं। विशेष रूप से पंडित विष्णु शर्मा जी द्वारा कराए गए विधिवत हवन और पूजा अनगिनत लाभ प्रदान करते हैं।
माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा का महत्व
- यह मंदिर माँ बगलामुखी का सिद्धपीठ है, जो शत्रु-विजय और वाणी की शक्ति प्रदान करता है।
- नवरात्रि के समय यहाँ हवन, पूजन और विशेष अनुष्ठान का आयोजन होता है।
- मान्यता है कि नलखेड़ा मंदिर में की गई पूजा और हवन से शत्रु बाधा, कोर्ट केस, ग्रह दोष और जीवन की अन्य परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं।
हवन-पूजन एवं अनुष्ठान करने के लाभ
व्यापार वृद्धि और सफलता
नवरात्रि में माँ बगलामुखी का आशीर्वाद लेकर हवन करने से व्यापार और व्यवसाय में उन्नति होती है।
शत्रु नाश और विजय
माँ बगलामुखी को "शत्रु विनाशिनी" कहा जाता है। पूजा और मंत्र जाप से शत्रुओं का प्रभाव नष्ट होता है और विजय प्राप्त होती है।
आत्मबल और शांति
हवन से आत्मबल की प्राप्ति होती है और मन में स्थिरता आती है।
ऋण और कर्ज से मुक्ति
विशेष अनुष्ठान से कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है और जीवन स्थिर होता है।
ग्रह दोष शांति
जिनके जीवन में ग्रहों का अशुभ प्रभाव है, उनके लिए नवरात्रि का हवन विशेष लाभकारी होता है।
शीघ्र विवाह और दांपत्य सुख
माँ बगलामुखी के आशीर्वाद से विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
कोर्ट केस और कानूनी सफलता
कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय पाने के लिए माँ बगलामुखी का हवन अत्यंत प्रभावी है।
संतान सुख और परिवारिक उन्नति
हवन और पूजा से संतान की प्राप्ति और परिवार में खुशहाली आती है।
संपत्ति प्राप्ति
जीवन की बाधाओं को दूर कर संपत्ति और शांति की प्राप्ति होती है।
आकषर्ण शक्ति और व्यक्तित्व में निखार
माँ बगलामुखी की कृपा से व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।
नवरात्रि के 9 दिन और पूजा का महत्व
पहला दिन (माँ शैलपुत्री) – संकल्प और साधना
दूसरा दिन (माँ ब्रह्मचारिणी) – तपस्या और संयम
तीसरा दिन (माँ चंद्रघंटा) – साहस और शत्रु नाश
चौथा दिन (माँ कूष्मांडा) – शक्ति और उन्नति
पाँचवाँ दिन (माँ स्कंदमाता) – परिवारिक सुख
छठा दिन (माँ कात्यायनी) – शत्रु-विजय और साहस
सातवाँ दिन (माँ कालरात्रि) – भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति
आठवाँ दिन (माँ महागौरी) – शांति और समृद्धि
नवाँ दिन (माँ सिद्धिदात्री) – सिद्धियाँ और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति
नवरात्रि में करने योग्य विशेष अनुष्ठान
- बगलामुखी हवन – शत्रु और बाधाओं से मुक्ति।
- मंत्र जाप – "ॐ ह्लीं बगलामुखि…" का जप।
- दीपदान – संध्या समय दीपक जलाकर शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
- भोग अर्पण – पीले वस्त्र, हल्दी और चने का प्रसाद।
क्यों खास है नलखेड़ा का हवन-पूजन?
- यहाँ की गई पूजा का प्रभाव तीव्र और शीघ्र होता है।
- नवरात्रि के दिनों में यहाँ अनुष्ठान करने से 100 गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
- पंडित विष्णु शर्मा जी द्वारा कराए गए सटीक विधि-विधान से पूजा और भी प्रभावी होती है।
पंडित विष्णु शर्मा जी से विशेष अनुष्ठान
यदि आप जीवन की परेशानियों से मुक्ति चाहते हैं तो इस नवरात्रि नलखेड़ा में माँ बगलामुखी हवन-पूजन जरूर कराएं।
पंडित विष्णु शर्मा जी, जो वर्षों से माँ बगलामुखी साधना में पारंगत हैं, आपके लिए विधिपूर्वक हवन और अनुष्ठान करेंगे।
📞 संपर्क करें: +91 7389567650
🌐 www.maabaglamukhi.guru
निष्कर्ष
शारदीय नवरात्रि 2025 (22 सितंबर से 1 अक्टूबर) माँ बगलामुखी की साधना और अनुष्ठान का श्रेष्ठ समय है। इस दौरान नलखेड़ा मंदिर में हवन-पूजन करने से शत्रु बाधा, कर्ज, कोर्ट केस, ग्रह दोष, विवाह और पारिवारिक समस्याओं का समाधान होता है।
इस बार की नवरात्रि को विशेष बनाएं और माँ बगलामुखी की कृपा से अपने जीवन को सुख, शांति और सफलता से भरें।