नवरात्रि हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा पर्व है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। खास बात यह है कि माँ बगलामुखी, जिन्हें “स्तंभिनी शक्ति” भी कहा जाता है, नवरात्रि में विशेष रूप से साधना और मंत्र-जप के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।
माँ बगलामुखी की साधना से शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में सफलता, नकारात्मक शक्तियों का नाश और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। नवरात्रि 2025 में यदि आप नौ दिनों तक सही विधि से माँ बगलामुखी के मंत्रों का जप और साधना करते हैं, तो आपको अद्भुत परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
क्यों करें माँ बगलामुखी की साधना नवरात्रि 2025 में?
- जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए
- कोर्ट केस या मुकदमे में विजय के लिए
- शत्रुओं और विरोधियों से सुरक्षा के लिए
- व्यवसाय और करियर में सफलता हेतु
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास के लिए
नवरात्रि का समय साधना के लिए इसलिए श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इस दौरान देवी शक्ति का आह्वान करना हजारों गुना फलदायी होता है।
माँ बगलामुखी के 9 दिन के विशेष मंत्र और साधना विधि
पहला दिन (प्रतिपदा)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः
- विधि:
पीले वस्त्र पहनकर, पीले आसन पर बैठें और 108 बार इस मंत्र का जप करें। यह साधना शत्रुओं की शक्ति को रोकने में मदद करती है।
दूसरा दिन (द्वितीया)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं वदनं स्तम्भय ह्लीं
- विधि:
सरसों के तेल का दीपक जलाकर, शहद का भोग लगाएँ और 11 माला जप करें। यह वाणी को प्रभावशाली बनाता है।
तीसरा दिन (तृतीया)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
- विधि:
मुकदमों और कोर्ट केस में विजय के लिए यह दिन विशेष है। 21 बार यह मंत्र बोलें।
चौथा दिन (चतुर्थी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां स्तम्भनं कुरु कुरु स्वाहा
- विधि:
पीले पुष्प अर्पित करें और 3 माला जप करें। यह शत्रु पर विजय दिलाता है।
पाँचवां दिन (पंचमी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै फट्
- विधि:
पीले चने की दाल का भोग लगाएँ और 11 माला जप करें। यह साधना आर्थिक स्थिरता के लिए की जाती है।
छठा दिन (षष्ठी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं स्तम्भय कीलय सर्वदुष्टानां मुखं वाचं बुद्धिं बधिरं कुरु ह्लीं ॐ स्वाहा
- विधि:
पीली सरसों की आहूति अग्नि में दें और 5 माला जप करें।
सातवां दिन (सप्तमी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखि देव्यै नमः
- विधि:
इस दिन साधक को मौन रहकर जप करना चाहिए। मौन साधना से मानसिक शक्ति बढ़ती है।
आठवां दिन (अष्टमी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वशत्रु निवारणं कुरु कुरु स्वाहा
- विधि:
अष्टमी पर कन्या पूजन करें और फिर मंत्र का जप करें। यह साधना शत्रुओं का नाश करती है।
नौवां दिन (नवमी)
- मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै सर्वदुष्टानां स्तम्भनं कीलनं कुरु कुरु स्वाहा
- विधि:
108 आहूतियाँ अग्नि में दें और इस मंत्र का जप करें। नवमी की साधना पूर्ण फलदायी होती है।
साधना में ध्यान रखने योग्य बातें
- हमेशा पीले वस्त्र और पीले आसन का प्रयोग करें।
- पीले फूल, हल्दी, चना दाल और गुड़ का भोग अर्पित करें।
- साधना गुप्त रखें और पवित्रता का ध्यान रखें।
- साधना करने से पहले गुरु या ज्ञानी पंडित से मार्गदर्शन लें।
माँ बगलामुखी साधना से मिलने वाले लाभ
- शत्रु और विरोधी निष्क्रिय हो जाते हैं।
- कोर्ट केस और मुकदमों में सफलता मिलती है।
- व्यापार और करियर में उन्नति होती है।
- नकारात्मक ऊर्जा और काले जादू से मुक्ति मिलती है।
- आत्मविश्वास और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
FAQs
Q. क्या कोई भी व्यक्ति माँ बगलामुखी की साधना कर सकता है?
हाँ, लेकिन यह साधना योग्य गुरु की देखरेख में करने से सर्वोत्तम फल मिलता है।
Q. क्या नवरात्रि ही साधना के लिए श्रेष्ठ समय है?
हाँ, नवरात्रि साधना का सर्वश्रेष्ठ काल है, परंतु विशेष परिस्थितियों में सालभर भी साधना की जा सकती है।
Q. कितनी बार मंत्र जप करना चाहिए?
कम से कम 108 बार रोज़ जप करना चाहिए। साधक की क्षमता अनुसार यह संख्या बढ़ाई जा सकती है।
निष्कर्ष
नवरात्रि 2025 आपके लिए माँ बगलामुखी की साधना का सर्वोत्तम अवसर लेकर आ रही है। यदि आप इन नौ दिनों में विशेष मंत्रों और विधियों से साधना करते हैं, तो आपके जीवन की सभी बाधाएँ दूर होंगी और शत्रु स्वतः ही परास्त हो जाएंगे।
यदि आप भी नवरात्रि 2025 में माँ बगलामुखी की शक्तिशाली साधना करवाना चाहते हैं या अपने जीवन की समस्याओं का समाधान पाना चाहते हैं, तो आज ही हमारे अनुभवी पंडित जी से संपर्क करें।
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